ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 6464.2श्रीरामचरितमानस 64.2नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज। आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज ॥63(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय