ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 22.3श्रीरामचरितमानस 2.3बैठि देखि कुसासन जटा मुकुट कृस गात। राम राम रघुपति जपत स्त्रवत नयन जलजात ॥1(ख)॥पिछलापूरा अध्याय