ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1818.2श्रीरामचरितमानस 18.2जामवंत नीलादि सब पहिराए रघुनाथ। हियँ धरि राम रूप सब चले नाइ पद माथ ॥17(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय