ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1515.8श्रीरामचरितमानस 15.8करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।। सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही ॥8॥पिछलाअगलापूरा अध्याय