ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1313.5श्रीरामचरितमानस 13.5भिन्न भिन्न अस्तुति करि गए सुर निज निज धाम। बंदी बेष बेद तब आए जहँ श्रीराम ॥12(ख)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय