ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1313.4श्रीरामचरितमानस 13.4वह सोभा समाज सुख कहत न बनइ खगेस। बरनहिं सारद सेष श्रुति सो रस जान महेस ॥12(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय