Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 126.3

गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन।
बिनु हरि कृपा न होइ सो गावहिं बेद पुरान ॥125(ख)॥

पूरा अध्याय