ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 125125.2श्रीरामचरितमानस 125.2जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल। सो कृपालु मोहि तो पर सदा रहउ अनुकूल ॥124(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय