ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 124124.4श्रीरामचरितमानस 124.4नाथ जथामति भाषेउँ राखेउँ नहिं कछु गोइ। चरित सिंधु रघुनायक थाह कि पावइ कोइ ॥123॥पिछलापूरा अध्याय