ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 124124.3श्रीरामचरितमानस 124.3आजु धन्य मैं धन्य अति जद्यपि सब बिधि हीन। निज जन जानि राम मोहि संत समागम दीन ॥123(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय