ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 119119.2श्रीरामचरितमानस 119.2तब फिरि जीव बिबिध बिधि पावइ संसृति क्लेस। हरि माया अति दुस्तर तरि न जाइ बिहगेस ॥118(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय