ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 118118.5श्रीरामचरितमानस 118.5एहि बिधि लेसै दीप तेज रासि बिग्यानमय।। जातहिं जासु समीप जरहिं मदादिक सलभ सब ॥117(घ)॥पिछलापूरा अध्याय