Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 113.3

उमा जे राम चरन रत बिगत काम मद क्रोध।।
निज प्रभुमय देखहिं जगत केहि सन करहिं बिरोध ॥112(ख)॥

पूरा अध्याय