ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 111111.5श्रीरामचरितमानस 111.5तब मैं कहा कृपानिधि तुम्ह सर्बग्य सुजान। सगुन ब्रह्म अवराधन मोहि कहहु भगवान ॥110(घ)॥पिछलापूरा अध्याय