ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 111111.3श्रीरामचरितमानस 111.3मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन। देखि चरन सिरु नायउँ बचन कहेउँ अति दीन ॥110(ख)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय