ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 103103.1श्रीरामचरितमानस 103.1अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।। सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता। मति थोरि कठोरि न कोमलता ॥1॥अगलापूरा अध्याय