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श्रीरामचरितमानस 100.2

ब्रह्म ग्यान बिनु नारि नर कहहिं न दूसरि बात।
कौड़ी लागि लोभ बस करहिं बिप्र गुर घात ॥99(क)॥

पूरा अध्याय