ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1010.2श्रीरामचरितमानस 10.2नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस। अस्त भएँ बिगसत भईं निरखि राम राकेस ॥9(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय