ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 4747.2श्रीरामचरितमानस 47.2देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार। एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार ॥46॥पिछलापूरा अध्याय