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श्रीरामचरितमानस 33.3

उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ ॥32(ख)॥

पूरा अध्याय