ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 3333.2श्रीरामचरितमानस 33.2तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास। कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास ॥32(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय