ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 3232.2श्रीरामचरितमानस 32.2अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास। सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास ॥31(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय