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श्रीरामचरितमानस 24.5

जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।
तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष ॥23(घ)॥

पूरा अध्याय