ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 2424.2श्रीरामचरितमानस 24.2सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ। फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ ॥23(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय