ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 2323.3श्रीरामचरितमानस 23.3पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास। सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास ॥22(ख)॥पिछलापूरा अध्याय