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श्रीरामचरितमानस 23.2

जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु ॥22(क)॥

पूरा अध्याय