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श्रीरामचरितमानस 16.3

अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।
प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ ॥15(ख)॥

पूरा अध्याय