ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 1616.2श्रीरामचरितमानस 16.2अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान। मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान ॥15(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय