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श्रीरामचरितमानस 120.2

इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।
सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम ॥119(क)॥

पूरा अध्याय