ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 117117.4श्रीरामचरितमानस 117.4बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावउँ बीर। सुमिरत अनुज प्रीति प्रभु पुनि पुनि पुलक सरीर ॥116(ग)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय