ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 116116.2श्रीरामचरितमानस 116.2अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।। काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन ॥2॥पिछलाअगलापूरा अध्याय