ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 116116.1श्रीरामचरितमानस 116.1मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।। मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन ॥1॥अगलापूरा अध्याय