ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 114114.8श्रीरामचरितमानस 114.8बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।। मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास ॥8॥पिछलाअगलापूरा अध्याय