ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 114114.2श्रीरामचरितमानस 114.2जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।। यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ ॥2॥पिछलाअगलापूरा अध्याय