ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 102102.11श्रीरामचरितमानस 102.11ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास। जिमि निज बल अनुरूप ते माछी उड़इ अकास ॥101(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय