ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 88.5श्रीरामचरितमानस 8.5देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब। बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब ॥7(घ)॥पिछलापूरा अध्याय