Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 52.3

लाग न उर उपदेसु जदपि कहेउ सिवँ बार बहु।
बोले बिहसि महेसु हरिमाया बलु जानि जियँ ॥51॥

पूरा अध्याय