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श्रीरामचरितमानस 352.2

देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।
तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ ॥351॥

पूरा अध्याय