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श्रीरामचरितमानस 351.2

एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।
भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु ॥350(क)॥

पूरा अध्याय