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श्रीरामचरितमानस 319.2

को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली।
कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली।।
आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकल हियँ हरषित भई।।
अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई।।

पूरा अध्याय