ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 306306.2श्रीरामचरितमानस 306.2हरषि परसपर मिलन हित कछुक चले बगमेल। जनु आनंद समुद्र दुइ मिलत बिहाइ सुबेल ॥305॥पिछलापूरा अध्याय