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श्रीरामचरितमानस 30.4

एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।
बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ ॥29(ग)॥

पूरा अध्याय