ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 278278.2श्रीरामचरितमानस 278.2लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल। जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल ॥277॥पिछलापूरा अध्याय