ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 224224.2श्रीरामचरितमानस 224.2हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद। जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद ॥223॥पिछलापूरा अध्याय