Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 167.1

तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।।
छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।
आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।
सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।।
राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।
एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।

पूरा अध्याय