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श्रीरामचरितमानस 160.3

तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ ॥159(ख)॥

पूरा अध्याय