ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 156156.2श्रीरामचरितमानस 156.2जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग। बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग ॥155॥पिछलापूरा अध्याय