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श्रीरामचरितमानस 15.8

बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।
होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि ॥14(छ)॥

पूरा अध्याय