Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 15.6

बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।
जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु ॥14(ङ)॥

पूरा अध्याय