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श्रीरामचरितमानस 11.4

स्याम सुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं सब पान।
गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहिं सुजान ॥10(ख)॥

पूरा अध्याय